विस्तृत उत्तर
हाथ जोड़कर प्रार्थना का महत्व वैदिक परंपरा और योग शास्त्र में वर्णित है:
1अंजलि मुद्रा
दोनों हाथों को जोड़ना 'अंजलि मुद्रा' है। यह हिंदू, बौद्ध और जैन — सभी में एक समान है।
2द्वैत का मिलन
योग शास्त्र में: दाहिना हाथ = पुरुष (शिव); बाएं हाथ = प्रकृति (शक्ति)। दोनों को जोड़ना = शिव-शक्ति का मिलन = द्वैत से अद्वैत।
3समर्पण
खाली हाथ जोड़ना — 'मेरे पास देने को कुछ नहीं, केवल अपना मन अर्पित करता हूँ।' समर्पण का भाव।
4हृदय के सामने
हाथ हृदय के सामने जोड़ते हैं — यह हृदय से प्रार्थना का प्रतीक। 'मन से, हृदय से, आत्मा से।'
5वैज्ञानिक
दोनों हाथों की उँगलियाँ मस्तिष्क के अलग-अलग भागों से जुड़ी हैं। दोनों हाथ जोड़ने से दोनों भाग सक्रिय होते हैं — ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है।
6नमस्कार में भेद
- ▸प्रणाम — झुककर प्रणाम, चरण स्पर्श
- ▸नमस्कार — खड़े होकर हाथ जोड़ना
- ▸साष्टांग — भूमि पर आठ अंगों से प्रणाम





