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पूजा रहस्य📜 आगम शास्त्र — आरती विधान, स्कंद पुराण, विष्णु पुराण2 मिनट पठन

पूजा के बाद आरती क्यों करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

आरती क्यों: भगवान का पूर्ण दर्शन (ज्योति प्रकाश में)। पाँच इंद्रियों का एकत्र समर्पण (देखना-सुनना-सूँघना-ताप-बजाना)। स्कंद पुराण: 'आरती जैसा पाप हरने वाला कुछ नहीं।' दक्षिणावर्त घुमाएं, माथे से लगाएं। पूजा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग।

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विस्तृत उत्तर

आरती का महत्व आगम शास्त्र, स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित है:

1दर्शन की पूर्णता

आरती के समय भगवान का पूर्ण दर्शन होता है — ज्योति से देव के सम्पूर्ण स्वरूप का दर्शन। विष्णु पुराण: 'आरात्रिकेण देवस्य दर्शनं सफलं भवेत्।'

2पंच आरती का महत्व

  • पंचदीप आरती = पाँच तत्वों का एकत्र अर्पण
  • एकदीप = सूर्य का प्रतीक

3पाँच इंद्रियों का समर्पण

आरती में पाँच इंद्रियाँ एकत्र होती हैं:

  • नेत्र — ज्योति देखना
  • कान — आरती गीत सुनना
  • नासिका — कपूर-धूप सूँघना
  • त्वचा — ज्योति का ताप
  • हाथ — घंटी बजाना

4पाप क्षय

स्कंद पुराण में कहा गया है — 'नीराजनसमं किञ्चित् पापहारि न विद्यते।' — आरती के समान पाप हरने वाला कोई दूसरा उपाय नहीं।

5पूजा की समाप्ति

आरती पूजा का अंतिम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है। इसके बाद देवी/देव की कृपा दृष्टि मानी जाती है।

आरती का नियम

दक्षिणावर्त (clockwise) — नाभि से मुकुट तक; घंटी बजाते हुए; फिर आरती को माथे से लगाएं।

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शास्त्रीय स्रोत
आगम शास्त्र — आरती विधान, स्कंद पुराण, विष्णु पुराण
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