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पूजा रहस्य📜 स्कंद पुराण — कलश महात्म्य, देवी भागवत पुराण, अथर्व वेद2 मिनट पठन

पूजा में कलश क्यों रखा जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

कलश क्यों: समुद्र मंथन के अमृत पात्र का प्रतीक। कलश मंत्र: मुख में विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा। पंचतत्व का प्रतीक। नवरात्रि में देवी का अस्थायी निवास। अथर्व वेद: कलश पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक।

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विस्तृत उत्तर

कलश का महत्व स्कंद पुराण, देवी भागवत और अथर्व वेद में वर्णित है:

1कलश = समुद्र मंथन का प्रतीक

स्कंद पुराण में कहा गया है — कलश में समुद्र का वास है। समुद्र मंथन से अमृत निकला था — कलश वह अमृत पात्र है।

2तीर्थों का वास

कलश स्थापना के मंत्र में कहा गया है:

> 'कलशस्य मुखे विष्णुः, कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।

> मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा, मध्ये मातृगणाः स्मृताः।'

— कलश के मुख में विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा और मध्य में देवियाँ निवास करती हैं।

3पंचतत्व का प्रतीक

कलश में रखी जाने वाली वस्तुएं — मिट्टी, जल, सुपारी, सिक्का, आम पत्ते — पाँच तत्वों का प्रतीक हैं।

4मंगल और समृद्धि

कलश मंगल का प्रतीक है। अथर्व वेद में कलश को समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक कहा गया है।

5देवी का निवास

नवरात्रि में कलश में देवी का आवाहन किया जाता है — कलश देवी का अस्थायी निवास बन जाता है।

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शास्त्रीय स्रोत
स्कंद पुराण — कलश महात्म्य, देवी भागवत पुराण, अथर्व वेद
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