विस्तृत उत्तर
नारियल चढ़ाने का महत्व स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित है:
1श्रीफल — लक्ष्मी का फल
नारियल को 'श्रीफल' कहते हैं — श्री (लक्ष्मी) का फल। लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुईं और नारियल भी समुद्र से उत्पन्न है — इसीलिए नारियल लक्ष्मी प्रिय है।
2त्रिदेव का प्रतीक
नारियल पर तीन आँखें होती हैं — ये ब्रह्मा-विष्णु-महेश की प्रतीक हैं। नारियल की तीन आँखें शिव के त्रिनेत्र का स्मरण कराती हैं।
3सम्पूर्ण समर्पण
नारियल बाहर से कठोर और भीतर से मीठा-शीतल होता है — यह साधक के जीवन का प्रतीक है। नारियल चढ़ाना पूर्ण समर्पण है — जैसे नारियल अपना सब कुछ देता है।
4अहंकार का त्याग
नारियल के ऊपर की जटाएं अहंकार का प्रतीक हैं। नारियल तोड़ना = अहंकार को भगवान के चरणों में तोड़ना।
5शुद्ध और पूर्ण
नारियल अंदर से पूर्ण शुद्ध होता है — यह श्रेष्ठ नैवेद्य है। पानी = जल तत्व; गरी = पृथ्वी तत्व।





