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पूजा रहस्य📜 विष्णु पुराण, पद्म पुराण — पुष्प महात्म्य, भगवद् गीता (9.26)2 मिनट पठन

पूजा में फूल क्यों चढ़ाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

फूल क्यों: गीता 9.26 — भगवान स्वयं कहते हैं 'जो भक्तिपूर्वक पुष्प अर्पित करे, उसे मैं ग्रहण करता हूँ।' फूल सौंदर्य, सुगंध और जीवन की नश्वरता का प्रतीक। 'मनःपुष्पं समर्पयामि' — मन रूपी पुष्प अर्पण। विष्णु को तुलसी, शिव को बेलपत्र, दुर्गा को लाल गुड़हल।

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विस्तृत उत्तर

पूजा में फूल अर्पण का महत्व विष्णु पुराण, पद्म पुराण और भगवद् गीता में वर्णित है:

1भगवद् गीता का आधार

श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं (9.26):

> 'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति। तदहं भक्त्युपहृतम् अश्नामि प्रयतात्मनः।'

— जो मुझे पत्र, पुष्प, फल या जल भक्तिपूर्वक अर्पित करता है, उसे मैं ग्रहण करता हूँ।

2प्रकृति का प्रसाद

फूल प्रकृति की सबसे सुंदर रचना है। उसे देव को अर्पित करना — प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव है।

3सुगंध

पुष्प की सुगंध देवता को प्रसन्न करती है। पद्म पुराण: 'पुष्पेण पूजितो देवः प्रसन्नो भवति सदा।'

4अहंकार का विसर्जन

फूल खिलकर झड़ जाता है — इसी प्रकार जीवन नश्वर है। पुष्प अर्पण जीवन की नश्वरता का स्मरण है।

5मन का प्रतीक

विष्णु पुराण में कहा गया है — 'मनःपुष्पं समर्पयामि' — मन रूपी पुष्प भगवान को अर्पित करते हैं।

देवता अनुसार फूल

  • विष्णु: तुलसी और कमल
  • शिव: बेलपत्र, धतूरा
  • दुर्गा: लाल गुड़हल
  • लक्ष्मी: कमल
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शास्त्रीय स्रोत
विष्णु पुराण, पद्म पुराण — पुष्प महात्म्य, भगवद् गीता (9.26)
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