विस्तृत उत्तर
पूजा में फूल अर्पण का महत्व विष्णु पुराण, पद्म पुराण और भगवद् गीता में वर्णित है:
1भगवद् गीता का आधार
श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं (9.26):
> 'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति। तदहं भक्त्युपहृतम् अश्नामि प्रयतात्मनः।'
— जो मुझे पत्र, पुष्प, फल या जल भक्तिपूर्वक अर्पित करता है, उसे मैं ग्रहण करता हूँ।
2प्रकृति का प्रसाद
फूल प्रकृति की सबसे सुंदर रचना है। उसे देव को अर्पित करना — प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव है।
3सुगंध
पुष्प की सुगंध देवता को प्रसन्न करती है। पद्म पुराण: 'पुष्पेण पूजितो देवः प्रसन्नो भवति सदा।'
4अहंकार का विसर्जन
फूल खिलकर झड़ जाता है — इसी प्रकार जीवन नश्वर है। पुष्प अर्पण जीवन की नश्वरता का स्मरण है।
5मन का प्रतीक
विष्णु पुराण में कहा गया है — 'मनःपुष्पं समर्पयामि' — मन रूपी पुष्प भगवान को अर्पित करते हैं।
देवता अनुसार फूल
- ▸विष्णु: तुलसी और कमल
- ▸शिव: बेलपत्र, धतूरा
- ▸दुर्गा: लाल गुड़हल
- ▸लक्ष्मी: कमल





