विस्तृत उत्तर
पूजा में चावल (अक्षत) का महत्व विष्णु पुराण और धर्म सिंधु में वर्णित है:
1'अक्षत' — न टूटा हुआ
अक्षत' = 'अ + क्षत' = जो टूटा न हो। साबुत चावल भगवान को अर्पित करते हैं। खंडित चावल वर्जित है।
2पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक
चावल पूर्ण अन्न है — इसमें जीवन की सम्पूर्ण ऊर्जा है। धन-समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक।
3लक्ष्मी का प्रिय
धान (चावल) लक्ष्मी का प्रिय अन्न है। लक्ष्मी पूजा में अक्षत का विशेष महत्व।
4हल्दी-अक्षत
हल्दी में रँगे पीले चावल — सोने का प्रतीक, शुभ और मांगलिक। देवी पूजा में हल्दी-अक्षत का प्रयोग।
5अन्न दान
भगवान को अन्न अर्पित करना — 'अन्नं ब्रह्म' (तैत्तिरीय उपनिषद) की भावना। अन्न ब्रह्म का स्वरूप है।
नियम
- ▸साबुत चावल — खंडित नहीं
- ▸सफेद या हल्दी-रँगे पीले चावल
- ▸शिव पूजा में टूटे चावल वर्जित (विशेष रूप से)





