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पूजा रहस्य📜 भागवत पुराण, विष्णु पुराण — प्रसाद महात्म्य, गीता 4.242 मिनट पठन

पूजा में प्रसाद क्यों बांटा जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

प्रसाद क्यों: भगवान को अर्पित भोजन उनकी प्रसन्नता से युक्त होता है। गीता 4.24: 'यज्ञशेष' — भगवान को अर्पित भोजन ब्रह्म है। समता का भाव — सब एक ही भगवान के भक्त। प्रसाद दाएं हाथ से लें, भूमि पर न गिराएं, सबको समान वितरण।

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विस्तृत उत्तर

प्रसाद वितरण का महत्व भागवत पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित है:

1भगवान का आशीर्वाद

प्रसाद = 'प्र + साद' = विशेष प्रसन्नता। जो भोजन पहले भगवान को अर्पित हो, वह भगवान की प्रसन्नता लिए हुए होता है।

2गीता का आधार (4.24)

ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविः...' — अर्पण ब्रह्म है, हवि ब्रह्म है — जो खाया जाए वह ब्रह्म है। भगवान को अर्पित भोजन 'यज्ञशेष' बन जाता है।

3समता का भाव

प्रसाद सबको बाँटना — ऊँच-नीच का भेद मिटाना। सब एक ही भगवान के भक्त हैं।

4ऊर्जा का संचार

भागवत पुराण में कहा गया है — भगवान को अर्पित भोजन में विशेष दैवी ऊर्जा आ जाती है जो ग्रहण करने वाले को लाभकारी होती है।

5कृतज्ञता

प्रसाद ग्रहण करना — भगवान की देन के प्रति कृतज्ञता का भाव है।

प्रसाद ग्रहण का नियम

  • दाएं हाथ से ग्रहण करें
  • भूमि पर न गिरने दें
  • सबको समान रूप से वितरित करें
  • अस्वीकार न करें
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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण, विष्णु पुराण — प्रसाद महात्म्य, गीता 4.24
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