विस्तृत उत्तर
पूजा में घंटी बजाने का महत्व और रहस्य अग्नि पुराण, स्कंद पुराण और आगम शास्त्र में विस्तार से वर्णित है:
आगमिक (शास्त्रीय) कारण
1देव आह्वान
स्कंद पुराण में कहा गया है —
घंटानादं च देवस्य शृण्वंति देवताः। आयांति मोदमानाश्च तत्र देवालये सदा।' — घंटी की ध्वनि सुनकर देवता प्रसन्न होकर पूजा स्थान पर आते हैं।
2अशुभ शक्तियों का नाश
घंटी की ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है। भूत-प्रेत, नकारात्मक शक्तियाँ इस ध्वनि से दूर भागती हैं।
अग्नि पुराण: 'घंटारव समाकर्ण्य देवानां शत्रवो भयात्। दूरं पलायनं कुर्युः पापानि च विनाशयेत्।'
3मन की एकाग्रता
घंटी की ध्वनि मन को एकाग्र करती है — बाह्य विचार दूर होते हैं और मन पूजा में केंद्रित होता है।
4ॐ की ध्वनि
शास्त्रों में कहा गया है कि शुद्ध घंटी (bronze bell) की ध्वनि 'ॐ' के सबसे निकट होती है। इसीलिए घंटी को 'नादब्रह्म' का प्रतीक माना गया है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक ध्वनि विज्ञान (Cymatics) के अनुसार:
- ▸घंटी की ध्वनि 7 सेकंड तक गूँजती है और वातावरण में ऊर्जा तरंगें उत्पन्न करती है
- ▸इस ध्वनि की आवृत्ति (frequency) मस्तिष्क के alpha और beta तरंगों को प्रभावित करती है
- ▸घंटी में कैडमियम, जस्ता, तांबा, निकेल, क्रोमियम और मैंगनीज होता है — ये धातुएं मिलकर विशेष ध्वनि उत्पन्न करती हैं
घंटी बजाने की सही विधि
- 1आरती और पूजा आरंभ करने से पहले
- 2बाएं हाथ से घंटी पकड़ें
- 3दाहिने हाथ से आरती थाली
- 4लयबद्ध ध्वनि करें
- 5घंटी को हिलाते हुए देवता की ओर मुख करें
शंख का महत्व (घंटी के साथ)
शंख की ध्वनि घंटी से भी अधिक शक्तिशाली मानी गई है। विष्णु पुराण:
शंखे तीर्थानि सर्वाणि शंखे देवाश्च सर्वशः।' — शंख में सभी तीर्थ और सभी देवता निवास करते हैं।
घंटी खरीदते समय ध्यान दें
पीतल (brass) या काँसे (bronze) की घंटी सर्वोत्तम है। घंटी खरीदते समय उसकी ध्वनि सुनें — ध्वनि स्पष्ट, गहरी और देर तक गूँजने वाली होनी चाहिए।





