विस्तृत उत्तर
शंख बजाने का महत्व विष्णु पुराण और स्कंद पुराण में विस्तार से वर्णित है:
1विष्णु का प्रतीक
शंख विष्णु के चार आयुधों में से एक है — शंख, चक्र, गदा, पद्म। शंख बजाना विष्णु का स्मरण है। 'पाञ्चजन्य' — अर्जुन का शंख।
2विष्णु पुराण
शंखस्य दर्शनात् पापं नाशयति क्षणात्।
स्पर्शनात् पापजं दुःखं श्रवणाद् भुक्तिमुक्तिदम्।'
— शंख के दर्शन से पाप नष्ट, स्पर्श से दुःख और श्रवण से भोग-मुक्ति मिलती है।
3ध्वनि का वैज्ञानिक प्रभाव
शंख की ध्वनि 'ॐ' से मिलती है। वैज्ञानिक शोध के अनुसार शंख की ध्वनि 40 मीटर तक हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करती है।
4पूजा आरंभ और समाप्ति
शंख पूजा के आरंभ और समाप्ति पर बजाया जाता है — देवताओं को सूचना।
5घर में सकारात्मकता
नित्य शंख बजाने से घर का वातावरण सकारात्मक होता है।
शंख बजाने का नियम
- ▸पूजा से पहले और बाद में
- ▸बाएं हाथ में शंख, दाएं से ढकें
- ▸एक लंबी साँस लेकर बजाएं
- ▸वामावर्त शंख — विशेष रूप से शुभ





