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पूजा रहस्य📜 विष्णु पुराण — शंख महात्म्य, स्कंद पुराण, आगम शास्त्र2 मिनट पठन

पूजा में शंख क्यों बजाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

शंख क्यों: विष्णु के चार आयुधों में एक। विष्णु पुराण: दर्शन से पाप नाश, स्पर्श से दुःख नाश, श्रवण से भोग-मुक्ति। वैज्ञानिक: शंख ध्वनि हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट करती है। पूजा के आरंभ और समाप्ति पर बजाएं। वामावर्त शंख विशेष शुभ।

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विस्तृत उत्तर

शंख बजाने का महत्व विष्णु पुराण और स्कंद पुराण में विस्तार से वर्णित है:

1विष्णु का प्रतीक

शंख विष्णु के चार आयुधों में से एक है — शंख, चक्र, गदा, पद्म। शंख बजाना विष्णु का स्मरण है। 'पाञ्चजन्य' — अर्जुन का शंख।

2विष्णु पुराण

शंखस्य दर्शनात् पापं नाशयति क्षणात्।

स्पर्शनात् पापजं दुःखं श्रवणाद् भुक्तिमुक्तिदम्।'

— शंख के दर्शन से पाप नष्ट, स्पर्श से दुःख और श्रवण से भोग-मुक्ति मिलती है।

3ध्वनि का वैज्ञानिक प्रभाव

शंख की ध्वनि 'ॐ' से मिलती है। वैज्ञानिक शोध के अनुसार शंख की ध्वनि 40 मीटर तक हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करती है।

4पूजा आरंभ और समाप्ति

शंख पूजा के आरंभ और समाप्ति पर बजाया जाता है — देवताओं को सूचना।

5घर में सकारात्मकता

नित्य शंख बजाने से घर का वातावरण सकारात्मक होता है।

शंख बजाने का नियम

  • पूजा से पहले और बाद में
  • बाएं हाथ में शंख, दाएं से ढकें
  • एक लंबी साँस लेकर बजाएं
  • वामावर्त शंख — विशेष रूप से शुभ
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शास्त्रीय स्रोत
विष्णु पुराण — शंख महात्म्य, स्कंद पुराण, आगम शास्त्र
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