विस्तृत उत्तर
पंचामृत का वर्णन शिव पुराण और विष्णु पुराण में मिलता है:
पंचामृत = पाँच अमृत
| क्र. | सामग्री | मात्रा | महत्व |
|-----|---------|--------|-------|
| 1 | दूध | 5 चम्मच | शुद्धता, पोषण |
| 2 | दही | 2 चम्मच | समृद्धि |
| 3 | घी | 1 चम्मच | ज्ञान, तेज |
| 4 | शहद | 1 चम्मच | मधुरता |
| 5 | शक्कर/मिश्री | 2 चम्मच | आनंद |
बनाने की विधि
- 1सभी पाँच को क्रमशः मिलाएं
- 2अंत में तुलसी पत्ता (विष्णु पूजा में)
- 3अच्छी तरह मिलाएं
उपयोग
- ▸मूर्ति / शिवलिंग / शालिग्राम का अभिषेक
- ▸अभिषेक के बाद जल से स्नान
- ▸पंचामृत — प्रसाद के रूप में
महत्व
शिव पुराण: 'पंचामृतेन स्नपितो देवः प्रसन्नो भवति सदा।' — पंचामृत से स्नान कराने पर देव सदा प्रसन्न होते हैं।
मात्रा
कम मात्रा पर्याप्त — एक चम्मच पंचामृत अभिषेक में पर्याप्त है।





