विस्तृत उत्तर
प्रसाद बनाने के नियम भागवत पुराण और धर्म सिंधु में वर्णित हैं:
प्रसाद बनाने के नियम
1शुद्ध भाव
प्रसाद — मन में भगवान का स्मरण करते हुए बनाएं। 'यह मेरे भगवान के लिए है।'
2शुद्धि
- ▸स्नान के बाद बनाएं
- ▸स्वच्छ बर्तन
- ▸शुद्ध हाथों से
3सात्विक सामग्री
- ▸प्याज-लहसुन रहित
- ▸शुद्ध घी का उपयोग
- ▸ताजी सामग्री
4बनाने से पहले न चखें
भगवान को अर्पित करने से पहले स्वयं न चखें।
5सरल प्रसाद
- ▸पंचामृत (दूध+दही+घी+शहद+शक्कर) — सबसे सरल
- ▸खीर — सर्वदेव प्रिय
- ▸मोदक/लड्डू — गणेश प्रसाद
- ▸पंजीरी/पंचमेवा — सामान्य प्रसाद
6मात्रा
कम बनाएं जो पूरा वितरित हो सके। प्रसाद बचना भी उचित नहीं।
भागवत पुराण
भक्त्या प्रपन्नाय ददाति भगवान्' — जो भक्ति से अर्पित करे, भगवान उसे ग्रहण करते हैं।





