विस्तृत उत्तर
तिलक का महत्व शिव पुराण और योग शास्त्र में वर्णित है:
1आज्ञा चक्र का जागरण
योग शास्त्र में भौंहों के बीच 'आज्ञा चक्र' (तीसरा नेत्र) है। तिलक लगाने से इस चक्र पर दबाव पड़ता है — ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है।
2इष्ट देव का चिह्न
- ▸ऊर्ध्वपुंड्र (तिलक) — वैष्णव, 'ॐ' या 'V'
- ▸त्रिपुंड्र — शैव, तीन रेखाएं
- ▸कुमकुम — शाक्त
3मंगल और सुरक्षा
तिलक मंगल का प्रतीक। माथे पर तिलक — बुरी नजर से रक्षा।
4पहचान और संकल्प
तिलक — 'मैं इस देव का भक्त हूँ' — यह पहचान और संकल्प।
5वैज्ञानिक
चंदन का तिलक — मस्तिष्क को शीतल रखता है। कुमकुम (हल्दी + चूना) — एंटीसेप्टिक।
देवता अनुसार तिलक
- ▸विष्णु भक्त — चंदन का ऊर्ध्वपुंड्र
- ▸शिव भक्त — भस्म त्रिपुंड्र
- ▸देवी भक्त — कुमकुम




