विस्तृत उत्तर
मृत्यु के समय देह की पवित्रता के लिए कई शास्त्रीय विधान बताए गए हैं। मरणासन्न व्यक्ति को शय्या या खाट से हटाकर भूमि पर लिटाया जाता है। भूमि पर गोमय का लेपन करके उस पर कुशा बिछाई जाती है। व्यक्ति के दोनों हाथों और कंठ पर तुलसी पत्र रखे जाते हैं। उसके निकट शालिग्राम शिला स्थापित की जाती है। शरीर के नौ द्वारों में स्वर्ण के सूक्ष्म खंड रखने का विधान भी बताया गया है। इन उपायों को देह की पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता सुनिश्चित करने वाला माना गया है।
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