का सरल उत्तर
अभिषेक के बाद मूर्ति को गंगाजल से धोएं, पोंछें और पुनः पूजन करें। पंचामृत को दोनों हाथों में लेकर शीश से लगाकर प्रसाद ग्रहण करें और भक्तों में वितरित करें। इसे नाली में न बहाएं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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