विस्तृत उत्तर
जो साधक उपरोक्त जटिल तांत्रिक या पौराणिक विधान करने में असमर्थ हैं, वे पारद शिवलिंग की एक अत्यंत सरल दैनिक पूजा से भी अक्षय पुण्य और लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
स्थापना: योनिका का मुख उत्तर दिशा की ओर और साधक का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
सरल दैनिक क्रम (5 से 10 मिनट):
- 1प्रतिदिन प्रातः स्नान के पश्चात्, शुद्ध जल अथवा दुग्ध-मिश्रित जल (कच्चा दूध और जल) से पारद शिवलिंग पर अभिषेक करें।
- 2अभिषेक करते समय, शिव-पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का 5 से 10 मिनट तक निरंतर जाप करते रहें।
- 3अभिषेक के बाद शिवलिंग को एक स्वच्छ वस्त्र से पोंछकर उन पर चन्दन अथवा विभूति (भस्म) का त्रिपुंड तिलक लगाएं।
- 4एक बिल्व पत्र (यदि उपलब्ध हो) और जो भी श्वेत पुष्प या मौसमी पुष्प उपलब्ध हों, उन्हें अर्पित करें।
- 5भगवान के सम्मुख घी का एक दीपक और धूप (अगरबत्ती) प्रज्वलित करें।
- 6नैवेद्य (भोग) के रूप में चीनी, मिश्री, बताशे या किसी भी मौसमी फल का भोग लगाएं।
- 7घंटी बजाते हुए संक्षिप्त आरती करें और पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा-प्रार्थना करें।





