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विस्तृत उत्तर
इंद्रास्त्र का कोई भौतिक स्वरूप नहीं होता था। यह आह्वान किए जाने पर ही प्रकट होता था। योद्धा एक साधारण बाण को मंत्रों से अभिमंत्रित करता था और धनुष से छूटते ही वह बाण हजारों दिव्य बाणों में बदल जाता था। इस प्रकार इंद्रास्त्र एक पूर्णतः अलौकिक अस्त्र था जिसका अस्तित्व केवल मंत्र-शक्ति और देवराज इंद्र के आह्वान पर निर्भर था। यही इसे एक साधारण भौतिक हथियार से पूरी तरह अलग बनाता था।
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