विस्तृत उत्तर
मंत्र जप से भय दूर होने के शास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक दोनों आधार हैं:
शास्त्रीय
- 1गणपति अथर्वशीर्ष: 'ब्रह्माद्यावरणं विद्यात् न बिभेति कदाचनेति' — जो ब्रह्म तत्व को जान लेता है, वह कभी भयभीत नहीं होता।
- 2गीता (4.10): 'वीतरागभयक्रोधाः' — राग, भय और क्रोध से मुक्त होकर ईश्वर में स्थित।
- 3उपनिषद: 'अभयं प्रतिष्ठाम्' — अभय (निर्भयता) ही स्थिरता है।
कैसे दूर होता है
- 1ईश्वर शरणागति: मंत्र जप = ईश्वर से जुड़ाव। जब सर्वशक्तिमान साथ है तो भय किससे?
- 2आत्मविश्वास: नियमित जप → मानसिक शक्ति → आत्मविश्वास → भय कम।
- 3Vagus Nerve: वैज्ञानिक — मंत्र उच्चारण Vagus Nerve सक्रिय → Parasympathetic (शांति) तंत्र → Fight-or-Flight (भय) प्रतिक्रिया कम।
- 4Repetition: मन एक ध्वनि पर केंद्रित → भय के विचार स्थान नहीं पाते।
- 5ऊर्जा कवच: नियमित जप से सकारात्मक ऊर्जा = अदृश्य सुरक्षा कवच।
भय निवारण के विशेष मंत्र
- ▸हनुमान चालीसा ('भूत पिशाच निकट नहिं आवै')
- ▸महामृत्युंजय मंत्र (मृत्यु भय)
- ▸दुर्गा कवच (सर्व भय)
- ▸रामरक्षा स्तोत्र (सर्व सुरक्षा)
- ▸'ॐ नमः शिवाय' (शिव = अभय प्रदाता)





