विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में यमदूतों की उपस्थिति से पापी जीव की जो दशा होती है, उसका अत्यंत विस्तृत वर्णन किया गया है।
गरुड़ पुराण के अनुसार — यमदूतों को देखते ही पापी जीव अत्यंत भयभीत हो जाता है। उसका हृदय भय से काँप उठता है। इंद्रियाँ पहले से ही शिथिल हो चुकी होती हैं — वाणी नहीं होती, हाथ-पैर नहीं चलते। ऐसे में यमदूतों का दर्शन उसे और भी भयाक्रांत कर देता है। मल-मूत्र का विसर्जन हो जाता है — भय इतना तीव्र होता है कि शरीर का कोई नियंत्रण नहीं बचता।
जीव 'हाय-हाय' करते हुए, विलाप करते हुए शरीर से निकलता है। यमदूतों की तर्जनाओं (धमकियों) से उसका हृदय विदीर्ण हो जाता है। वह जोर से रोना चाहता है परंतु आवाज नहीं निकलती।
गरुड़ पुराण में यह भी कहा गया है कि पापी जीव के मन में यमदूतों को देखकर पछतावा होता है — वह सोचता है कि काश उसने जीवन में धर्म का पालन किया होता। परंतु उस समय कुछ नहीं बदला जा सकता।
पुण्यात्मा की स्थिति इसके विपरीत होती है — देवदूतों को देखकर वह शांत, प्रसन्न और तत्पर होता है।




