विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों द्वारा नरक का भय बार-बार सुनाने का उल्लेख इस प्रकार है — 'उस जीव को यम के दूत तर्जना करके डराते हैं और नरकों के तीव्र भय का पुनः-पुनः वर्णन करते हैं।' इस पुनरावृत्ति के पीछे अनेक कारण हैं।
पहला कारण — यह न्याय-प्रक्रिया का अंग है। यमलोक में न्याय होने से पहले जीव को यह जानना आवश्यक है कि उसके किस पाप का क्या फल होगा। नरक का वर्णन सुनाकर यमदूत उसे उसके कर्मों के परिणाम की पूर्व-सूचना देते हैं।
दूसरा कारण — यह पापी के लिए एक और यातना है। भय बार-बार सुनने से जीव की पीड़ा दोगुनी होती है। जो पहले से ही शारीरिक कष्ट में है, उसे मानसिक कष्ट भी दिया जाता है — यह कर्म के न्याय की पूर्णता है।
तीसरा कारण — यह जीव को उसके कर्म याद दिलाने का एक साधन है। जैसे-जैसे नरक का वर्णन होता है, जीव को याद आता है कि उसने किस पाप के लिए कौन-सी सजा के योग्य है।
चौथा कारण — यह वर्णन जीवित मनुष्यों के लिए भी है। गरुड़ पुराण का पाठ मृत्यु के बाद किया जाता है ताकि परिजन सुनकर जागरूक हों। बार-बार नरक का भय सुनाना इसीलिए किया गया है।
इस प्रकार नरक का बार-बार वर्णन न्याय, कर्म-बोध और जीवित मनुष्यों को प्रेरणा देने का माध्यम है।





