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न्याय — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

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कर्म सिद्धांत

बुरे कर्म करने वाले सुखी क्यों रहते हैं, उत्तर क्या?

बुरे कर्मी का सुख पूर्व जन्मों के पुण्य भंडार का फल है — यह अस्थायी है। बुरे कर्मों का फल विलंब से पर अवश्य आता है (कौरवों की तरह)। बाहरी सुख भीतरी शांति नहीं है। अंतिम न्याय अटल है।

बुरे कर्मसुखकर्मफल
हिंदू दर्शन

भगवान दुखों को क्यों नहीं रोकते

ब्रह्मसूत्र 2.1.34 — ईश्वर निर्दय नहीं; दुःख जीव के कर्मों से आता है। गीता 2.14 — सुख-दुःख अनित्य। अविद्या (अज्ञान) दुःख का मूल कारण। आत्मा दुःख से अप्रभावित (गीता 2.23)। ईश्वर ने मोक्ष मार्ग दिया — शाश्वत दुःख मुक्ति।

दुखकर्मईश्वर
आत्मा और मोक्ष

यमलोक क्या है और वहाँ क्या होता है

यमलोक = धर्मराज यम का न्यायालय। मृत्यु बाद यमदूत आत्मा को ले जाते हैं → चित्रगुप्त कर्म लेखा प्रस्तुत → यम कर्मानुसार न्याय (स्वर्ग/नरक/पुनर्जन्म)। भगवत्भक्त यमलोक नहीं जाते (भागवत 6.3 — अजामिल कथा)।

यमलोकयमराजधर्मराज
आत्मा और मोक्ष

चित्रगुप्त कर्मों का लेखा कैसे रखते हैं

चित्रगुप्त यमराज के सचिव हैं जो प्रत्येक जीव के हर कर्म (विचार, वचन, कर्म) का लेखा रखते हैं। मृत्यु बाद यमलोक में कर्म पुस्तक प्रस्तुत करते हैं। दार्शनिक दृष्टि से यह 'कर्माशय' (योगसूत्र 2.12) — अवचेतन में संचित कर्म-संस्कारों — का देवीकृत रूप है।

चित्रगुप्तकर्म लेखायमराज

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।