विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों द्वारा पापी जीव को डराकर ले जाने के पीछे एक सुस्पष्ट न्याय-व्यवस्था है।
पहली बात — यमदूत केवल पापियों को डराते हैं। जो पुण्यात्मा है, उसे लेने आने वाले देवदूत भयावह नहीं, सौम्य और दिव्य होते हैं। डराना केवल उनका भाग है जिन्होंने अपने जीवन में धर्म और दया का त्याग किया।
दूसरी बात — यह डर पाप का स्वाभाविक फल है। जो जीव जीवन में दूसरों को पीड़ा देता था, उनका शोषण करता था, झूठ बोलता था — वह मृत्यु के बाद स्वयं उसी का अनुभव करता है। यमदूतों का भय उसके कर्मों का प्रतिबिंब है।
तीसरी बात — गरुड़ पुराण में यमदूत तर्जना (धमकाना) इसलिए करते हैं ताकि जीव को उसके पापकर्मों का बोध हो। यमलोक में न्याय से पहले जीव का यह बोध आवश्यक है।
चौथी बात — यह एक संदेश है कि पाप का मार्ग अकेला और भयावह है। जीवन में जिसने भी दूसरों को अनदेखा किया, मृत्यु के बाद वह अकेला पड़ जाता है — उसका कोई साथी नहीं, कोई बचाने वाला नहीं।
इस प्रकार यमदूतों का डराना न्याय की प्रक्रिया का अनिवार्य अंग है।





