विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में धर्मराज के निर्णय का स्वरूप अत्यंत स्पष्ट और व्यवस्थित बताया गया है।
निर्णय के तीन विकल्प — धर्मराज के समक्ष मुख्यतः तीन प्रकार के निर्णय होते हैं। पहला, स्वर्ग — यदि पुण्य अधिक हो। दूसरा, नरक — यदि पाप अधिक हो। तीसरा, पुनर्जन्म — यदि पाप-पुण्य संतुलित हों या पाप-दंड के बाद पुनर्जन्म का अवसर हो।
निर्णय की विशेषताएँ — धर्मराज का निर्णय पूर्णतः निष्पक्ष और अटल होता है। वहाँ कोई रिश्ता काम नहीं आता, कोई पैसा नहीं चलता, कोई सिफारिश नहीं होती। 'विधाता लिखता है, चित्रगुप्त बांचता है और यमराज दंड देते हैं' — यह श्रृंखला अटूट है।
निर्णय की तत्कालता — निर्णय सुनते ही यमदूत जीव को उसके गंतव्य की ओर ले जाते हैं। कोई अपील, कोई प्रतीक्षा नहीं।
स्थायित्व — धर्मराज का निर्णय तब तक के लिए है जब तक पापों का दंड पूरा न हो। यह निरंतर नहीं — पापों का भोग पूरा होने पर पुनर्जन्म होता है। स्वर्ग और नरक दोनों अस्थायी हैं।
निर्णय में कोई त्रुटि नहीं — चित्रगुप्त के अचूक लेखे के कारण यमराज के निर्णय में कोई भूल नहीं होती।





