विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण और अन्य पुराणों में चित्रगुप्त के कार्य का विस्तृत वर्णन मिलता है।
कर्म-लेखन — चित्रगुप्त का मुख्य कार्य है प्रत्येक जीव के जन्म से मृत्यु तक के समस्त कर्मों का लेखा-जोखा रखना। केवल प्रकट कर्म नहीं — गुप्त से गुप्त, अकेले में किए गए पाप-पुण्य भी वे दर्ज करते हैं। कुछ भी उनसे छुपा नहीं रहता।
न्याय में सहयोग — जब जीव यमलोक पहुँचता है, तो चित्रगुप्त उसके कर्मों का लेखा यमराज के सामने प्रस्तुत करते हैं। वे एक 'वकील' की भूमिका निभाते हैं — निष्पक्ष और सटीक। इसी लेखे के आधार पर यमराज स्वर्ग, नरक या पुनर्जन्म का निर्णय लेते हैं।
सत्य का प्रमाण — यदि जीव अपने पापों से इनकार करे, तो चित्रगुप्त उसके कर्मों की 'फिल्म' दिखाते हैं — हर घटना, हर कर्म स्पष्ट रूप से। इस प्रमाण के आगे कोई बचाव नहीं चलता।
निष्पक्षता — चित्रगुप्त का न्याय पूर्णतः निष्पक्ष है। देवता, राजा, साधारण जन — सबके कर्म समान दृष्टि से तौले जाते हैं। महाभारत में युधिष्ठिर को भी उनके अर्धसत्य का हिसाब देना पड़ा था।




