विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पापी को यमलोक ले जाने के कारणों का स्पष्ट वर्णन है।
कर्म-न्याय के लिए — यमलोक कर्म-न्याय का स्थान है। चित्रगुप्त द्वारा रखे गए पाप-पुण्य के लेखे के आधार पर यमराज यह निर्णय करते हैं कि जीव को क्या प्राप्त होगा — स्वर्ग, नरक या पुनर्जन्म।
लेखा दिखाने के लिए — गरुड़ पुराण में — 'यमलोक पहुँचने पर चित्रगुप्त मृत्यु के बाद आत्मा के पापों और पुण्यों का लेखा-जोखा यमराज के सामने रखते हैं।'
पाप का साक्षात्कार — यमलोक में जीव को अपने पापों का साक्षात्कार होता है। वह देखता है कि उसने क्या किया और उसका क्या परिणाम है।
न्यायपूर्ण दंड निर्णय — 'पाप करने वाले लोगों को नरक में कड़ी सजा दी जाती है।' परंतु यह दंड यमराज के न्यायपूर्ण निर्णय के बाद ही दिया जाता है — बिना विचार के नहीं।
ब्रह्माण्डीय व्यवस्था — यमलोक ब्रह्माण्ड की न्याय-व्यवस्था का केंद्र है जिससे धर्म और कर्म का संतुलन बना रहता है।





