विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण और अन्य पुराणों में चित्रगुप्त द्वारा जीव से पूछताछ का वर्णन मिलता है।
चित्रगुप्त यमराज के समक्ष जीव के कर्मों का लेखा प्रस्तुत करते हैं। इस प्रक्रिया में जीव से कुछ प्रश्न किए जाते हैं। सबसे पहला प्रश्न — 'तुमने अपने जीवन में क्या धर्म किया? क्या दान किया? क्या भक्ति की?' यह प्रश्न उस लेखे को पुष्ट करने के लिए है जो चित्रगुप्त के पास पहले से मौजूद है।
यदि जीव झूठ बोले या अपने पापों से इनकार करे — तो चित्रगुप्त तत्काल उसके कर्मों का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। पुराणों में उल्लेख है कि वे कर्मों का दृश्य दिखाते हैं — जीव निःशब्द हो जाता है।
चित्रगुप्त यमराज को जीव के पाप-पुण्य का सटीक विवरण बताते हैं — कौन-सा पाप किया, कब, कहाँ, किसके साथ। इसी आधार पर यमराज निर्णय लेते हैं।
महाभारत की एक कथा में चित्रगुप्त ने स्वयं युधिष्ठिर के अर्धसत्य का लेखा प्रस्तुत किया था जिसके कारण उन्हें क्षणभर का नरक देखना पड़ा — यह उनकी निष्पक्षता का प्रमाण है।




