विस्तृत उत्तर
यमलोक यम (धर्मराज) का लोक है जहां मृत्यु के बाद आत्मा को कर्मानुसार न्याय प्राप्त होता है।
यमराज कौन हैं
- 1सूर्य पुत्र, छाया (संज्ञा) के गर्भ से जन्मे। शनि के भाई।
- 2कठोपनिषद में यम को धर्मराज कहा गया है — नचिकेता को उन्होंने आत्मज्ञान दिया।
- 3वे मृत्यु के देवता नहीं, बल्कि धर्म-न्याय के देवता हैं। दक्षिण दिशा के अधिपति।
यमलोक की प्रक्रिया (गरुड़ पुराण अनुसार)
- 1यमदूत — मृत्यु के बाद यमदूत आत्मा को (सूक्ष्म शरीर में) यमलोक ले जाते हैं। पुण्यात्मा के लिए यह यात्रा शांतिपूर्ण और पापात्मा के लिए कष्टदायक बताई गई है।
- 1यम मार्ग — गरुड़ पुराण में 86,000 योजन लंबे यम मार्ग का वर्णन है जिसमें वैतरणी नदी पार करनी होती है।
- 1चित्रगुप्त का लेखा — यमलोक में चित्रगुप्त (यम के सहायक) कर्मों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं (विस्तार अगले प्रश्न में)।
- 1यमराज का न्याय — कर्मों के आधार पर:
- ▸पुण्यात्मा → स्वर्ग या उत्तम पुनर्जन्म
- ▸पापात्मा → नरक में दंड, फिर निम्न योनि में पुनर्जन्म
- ▸मिश्रित कर्म → तदनुसार फल
- 1यम न्याय की विशेषता — यम पूर्णतः निष्पक्ष हैं। वे किसी पर कृपा या क्रोध नहीं करते — केवल कर्मानुसार न्याय।
कौन यमलोक नहीं जाता
- ▸भगवान के परम भक्त और मुक्त आत्माएं यमलोक नहीं जातीं। भागवत पुराण (6.3) में यम ने स्वयं अपने दूतों को बताया — विष्णु भक्तों को मत छूना।
- ▸अजामिल की कथा (भागवत 6.1-3) इसका प्रसिद्ध उदाहरण है — मृत्यु के समय 'नारायण' नाम लेने मात्र से यमदूत उसे नहीं ले जा सके।





