विस्तृत उत्तर
चित्रगुप्त हिंदू धर्म में कर्मों के दिव्य लेखाकार (Divine Accountant) हैं। वे यमराज के सहायक और सचिव हैं।
चित्रगुप्त कौन हैं
- 1पद्म पुराण और ब्रह्मांड पुराण के अनुसार चित्रगुप्त ब्रह्मा जी से उत्पन्न हुए।
- 2'चित्र' = चित्रित/लिखा हुआ, 'गुप्त' = छिपा हुआ — अर्थात जो छिपे हुए (गुप्त) कर्मों को भी चित्रित (लिखित) रखते हैं।
- 3कायस्थ समुदाय चित्रगुप्त को अपने आदि पुरुष मानता है।
कर्मों का लेखा कैसे रखते हैं
- 1सर्वव्यापी दृष्टि — चित्रगुप्त प्रत्येक जीव के प्रत्येक कर्म — विचार, वचन और कर्म — का लेखा रखते हैं। कोई कर्म छिपा नहीं रहता।
- 1अग्रलेखा (Record) — प्रत्येक जीव का एक कर्म लेखा (अग्रसंधानी/पुस्तक) होता है जिसमें जन्म से मृत्यु तक के सभी कर्म अंकित होते हैं।
- 1पुण्य और पाप दोनों — शुभ और अशुभ दोनों कर्म अलग-अलग लिखे जाते हैं।
- 1मृत्यु के बाद — यमलोक में चित्रगुप्त कर्मों की पुस्तक खोलकर यमराज के समक्ष पाठ करते हैं।
- 1न्याय — कर्मों के आधार पर यमराज निर्णय लेते हैं — स्वर्ग, नरक या पुनर्जन्म।
दार्शनिक व्याख्या
वेदांत दर्शन में 'चित्रगुप्त' को प्रतीकात्मक भी समझा जाता है:
- ▸हमारा अंतःकरण (अवचेतन मन) स्वयं कर्मों का लेखा रखता है — यही 'कर्माशय' है।
- ▸योगसूत्र (2.12) में कर्माशय का वर्णन है — कर्मों के संस्कार जो अवचेतन में संचित रहते हैं और भावी जन्मों में फल देते हैं।
- ▸चित्रगुप्त इसी कर्माशय/कर्म-संचय के देवीकृत (personified) रूप हो सकते हैं।
चित्रगुप्त पूजा
- ▸यम द्वितीया (भाई दूज) के दिन कुछ परंपराओं में चित्रगुप्त पूजा होती है।
- ▸कायस्थ समुदाय में चित्रगुप्त जयंती विशेष रूप से मनाई जाती है।





