विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में धर्मराज (यमराज) के कार्य का विस्तृत वर्णन मिलता है।
मृत्यु की देखरेख — धर्मराज प्रत्येक जीव की मृत्यु का समय और स्थान निर्धारित होने पर यमदूतों को भेजते हैं। उनकी आज्ञा के बिना कोई जीव मृत नहीं होता और कोई यमदूत जीव को नहीं ले जाता।
कर्म-न्याय — यही उनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। चित्रगुप्त के लेखे के आधार पर वे जीव के पाप-पुण्य का मूल्यांकन करते हैं और उसके अनुसार निर्णय देते हैं।
गंतव्य निर्धारण — न्याय के पश्चात वे जीव को उचित गंतव्य भेजते हैं — पुण्य अधिक हो तो स्वर्ग, पाप अधिक हो तो नरक, और जो उचित नरक-यातना के बाद पुनर्जन्म के योग्य हों उन्हें मृत्युलोक वापस।
निष्पक्षता — धर्मराज का न्याय पूर्णतः निष्पक्ष है। वे किसी के साथ पक्षपात नहीं करते। देवता भी उनसे नहीं बच सकते। वेबदुनिया के अनुसार — 'विधाता लिखता है, चित्रगुप्त बांचता है, यमदूत पकड़कर लाते हैं और यमराज दंड देते हैं।'
यमलोक-प्रशासन — यमलोक की समस्त व्यवस्था, यमदूतों का प्रबंधन और नरकों का संचालन भी उनके अधीन है।




