विस्तृत उत्तर
यमराज को धर्मराज इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे ब्रह्मांड में न्याय और दण्ड-विधान के सर्वोच्च अधिकारी हैं। उनका पद ब्रह्मांडीय न्यायपालिका का सर्वोच्च पद है, जहाँ से संपूर्ण सृष्टि के पाप-पुण्य का संतुलन स्थापित किया जाता है। वे पूर्णतः निष्पक्ष हैं और उनके निर्णय में तनिक भी त्रुटि या विलंब नहीं होता। यमराज भगवान विष्णु के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं और जीवात्मा को उसके कर्मों के अनुसार दंड, उच्च लोक या आगे की गति प्रदान करते हैं।
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