विस्तृत उत्तर
नहीं, सुदर्शन चक्र का वार कभी खाली नहीं जाता। यह अस्त्र अपने लक्ष्य का पीछा करता है चाहे वह कहीं भी छिपा हो और उसका संहार करने के उपरांत ही वापस अपने स्वामी के पास लौटता है। यह इसकी अचूक प्रकृति ही इसे सभी दिव्यास्त्रों में विशेष बनाती है। यह न्याय की निश्चितता और कर्मफल के सिद्धांत को पुष्ट करता है — अर्थात जिसने अधर्म किया है, सुदर्शन चक्र उसे अवश्य खोज निकालता है और दंड देता है। राजा अंबरीष के प्रसंग में दुर्वासा मुनि को भी यह अनुभव हुआ था।
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