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नवार्ण मंत्र: मार्कण्डेय पुराण में सहस्रलोचनी देवी का रहस्य !
सहस्रलोचनी

नवार्ण मंत्र: मार्कण्डेय पुराण में सहस्रलोचनी देवी

📿 पौराणिक•1 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 19 मई 2025
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सहस्रलोचनी देवी और नवार्ण मंत्र: मार्कण्डेय पुराण का ऐसा रहस्य जो बहुत कम जानते हैं मार्कण्डेय पुराण के मंत्र मार्कण्डेय पुराण के मंत्र (सहस्रलोचनी देवी एवं अन्य) मंत्र संग्रह सहस्रलोचनी देवी मंत्र: इसका मूलपाठ उपलब्ध स्निपेट्स में स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है, परन्तु एन.डी. श्रीमाली द्वारा एक साधना के संदर्भ में "शरीर को...

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मार्कण्डेय पुराण के मंत्र

मार्कण्डेय पुराण के मंत्र

(सहस्रलोचनी देवी एवं अन्य)

मंत्र संग्रह

सहस्रलोचनी देवी मंत्र:

इसका मूलपाठ उपलब्ध स्निपेट्स में स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है, परन्तु एन.डी. श्रीमाली द्वारा एक साधना के संदर्भ में "शरीर को सह लोचनी बना रहा हूं" का उल्लेख है, जो इस देवी की किसी विशिष्ट साधना की ओर संकेत करता है।

चामुण्डा/नवार्ण बीज युक्त मंत्र (मार्कण्डेय पुराण के संदर्भ में): ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः। (यह नवार्ण मंत्र है, जो दुर्गा सप्तशती का मूल है, और दुर्गा सप्तशती मार्कण्डेय पुराण का ही अंश है।)

देवता

सहस्रलोचनी देवी (संभवतः देवी का एक विशिष्ट रूप), चामुण्डा (दुर्गा)।

स्रोत

मार्कण्डेय पुराण (विशेषकर दुर्गा सप्तशती)।

प्रयोजन

सर्वसिद्धि, देवी की कृपा, बाधा निवारण, आध्यात्मिक शक्ति जागरण।

विधि

नवार्ण मंत्र का निरंतर जाप परम सिद्धिदायक माना गया है। सहस्रलोचनी देवी की विशिष्ट साधना विधि गुरुगम्य हो सकती है।

महत्व

मार्कण्डेय पुराण, और विशेष रूप से इसका अंश दुर्गा सप्तशती, शक्ति उपासना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रामाणिक ग्रंथ है। इसमें वर्णित मंत्र और स्तोत्र अत्यधिक शक्तिशाली माने जाते हैं। नवार्ण मंत्र सर्वविदित है, किन्तु सहस्रलोचनी जैसे देवी के विशिष्ट स्वरूपों से सम्बंधित मंत्र या साधनाएं अधिक गूढ़ और अल्पज्ञात हो सकती हैं, जो गहन साधकों के लिए होती हैं।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

मंत्र विज्ञान

देवी सूक्तम् का क्या महत्व है?

देवी सूक्तम् = ऋग्वेद (10.125), वाक् आम्भृणी द्वारा रचित। दुर्गा सप्तशती के पाठ के आरंभ/अंत में पढ़ा जाता है। देवी के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक। फल: मानसिक तनाव दूर, नकारात्मक ऊर्जा नाश, आध्यात्मिक उन्नति।

शिव की प्रमुख लीलाएं

'देव दीपावली' का क्या महत्व है?

'देव दीपावली' = कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरासुर वध की महान विजय पर देवताओं द्वारा मनाया गया उत्सव। इसी कारण शिव को 'त्रिपुरारी' भी कहते हैं।

पूजा विधि एवं नियम

देवी को सिंदूर चढ़ाते हैं क्या?

हाँ, देवी को सिंदूर अर्पित करते हैं। विशेष रूप से मां दुर्गा को सिंदूर बहुत प्रिय है। नवरात्रि में 'सिंदूर खेला' की परंपरा इसी भाव से है। देवी की माँग या मस्तक पर सिंदूर लगाना उनके सौभाग्यस्वरूप का सम्मान है।

नवरात्रि

देवी की पूजा में अष्टमी और नवमी का क्या विशेष महत्व है?

अष्टमी: देवी शक्ति सर्वोच्च, संधि पूजा, हवन, रक्तबीज वध। नवमी: कन्या पूजन (9=9 देवी), पूर्णाहुति, वरदान अध्याय। दोनों = नवरात्रि चरमोत्कर्ष — 2 दिन = 9 दिन फल।

शब्द ब्रह्म और मंत्र शक्ति

देवी मंत्र क्या होते हैं?

देवी मंत्र साधारण शब्द नहीं बल्कि देवी का ध्वनि-स्वरूप है — जपने पर उनकी चेतना की आवृत्ति का आवाहन होता है और यह जड़ पदार्थ में चेतना संचार करने में सक्षम देवी की साक्षात् शक्ति है।

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