मार्कण्डेय पुराण के मंत्र
(सहस्रलोचनी देवी एवं अन्य)
मंत्र संग्रह
सहस्रलोचनी देवी मंत्र:
इसका मूलपाठ उपलब्ध स्निपेट्स में स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है, परन्तु एन.डी. श्रीमाली द्वारा एक साधना के संदर्भ में "शरीर को सह लोचनी बना रहा हूं" का उल्लेख है, जो इस देवी की किसी विशिष्ट साधना की ओर संकेत करता है।
चामुण्डा/नवार्ण बीज युक्त मंत्र (मार्कण्डेय पुराण के संदर्भ में): ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः। (यह नवार्ण मंत्र है, जो दुर्गा सप्तशती का मूल है, और दुर्गा सप्तशती मार्कण्डेय पुराण का ही अंश है।)
देवता
सहस्रलोचनी देवी (संभवतः देवी का एक विशिष्ट रूप), चामुण्डा (दुर्गा)।
स्रोत
मार्कण्डेय पुराण (विशेषकर दुर्गा सप्तशती)।
प्रयोजन
सर्वसिद्धि, देवी की कृपा, बाधा निवारण, आध्यात्मिक शक्ति जागरण।
विधि
नवार्ण मंत्र का निरंतर जाप परम सिद्धिदायक माना गया है। सहस्रलोचनी देवी की विशिष्ट साधना विधि गुरुगम्य हो सकती है।
महत्व
मार्कण्डेय पुराण, और विशेष रूप से इसका अंश दुर्गा सप्तशती, शक्ति उपासना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रामाणिक ग्रंथ है। इसमें वर्णित मंत्र और स्तोत्र अत्यधिक शक्तिशाली माने जाते हैं। नवार्ण मंत्र सर्वविदित है, किन्तु सहस्रलोचनी जैसे देवी के विशिष्ट स्वरूपों से सम्बंधित मंत्र या साधनाएं अधिक गूढ़ और अल्पज्ञात हो सकती हैं, जो गहन साधकों के लिए होती हैं।
