विस्तृत उत्तर
सनातन परंपरा में 'राम' नाम को सर्वोच्च 'तारक मंत्र' कहा गया है, जिसका अर्थ है भवसागर से पार लगाने वाला मंत्र।
नाम की शक्ति — 'रा' को अग्नि स्वरूप माना जाता है जो जन्म-जन्मांतर के पापों और कर्म बंधनों को भस्म कर देता है। 'म' को जल (चंद्रमा) स्वरूप माना गया है जो आत्मा को असीम शीतलता और शांति प्रदान करता है।
अद्भुत अनुभव — राम नाम जपने वाले साधकों को सबसे पहले 'निर्भयता' का अनुभव होता है। उनके हृदय से मृत्यु और भविष्य का अज्ञात भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है और एक अकारण आनंद की अनुभूति होती है।
अजपा जाप — लंबे समय तक मानसिक जप करने से साधक की श्वास-प्रश्वास में स्वतः ही 'राम-राम' की ध्वनि गूंजने लगती है, जिससे विपरीत परिस्थितियों में भी उसका मन विचलित नहीं होता।





