विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण और तंत्र शास्त्रों के अनुसार, चूँकि यह शिवलिंग शिव के पराक्रमी सेनापति (योद्धा-गण) द्वारा स्थापित एक जाग्रत ऊर्जा-क्षेत्र है, इसलिए यह साधक के भीतर 'वीर-भाव' (आंतरिक वीरता), महाभय से मुक्ति और अजेय मानसिक बल को जाग्रत करता है। यह साधक की पशु-प्रवृत्ति (अहंकार) को नष्ट कर शिव के प्रति पूर्ण समर्पण और यौगिक अनुशासन (हठयोग) का बीजारोपण करता है।





