विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण में बाह्य 'शक्ति-परीक्षण' का कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं मिलता। परंतु काशी की ऐतिहासिक अखाड़ा और मल्ल-विद्या परंपरा में वीर-भाव के साधक नंदीषेण को अपना आराध्य मानते हैं। आगम शास्त्र आंतरिक योगिक बल (वीर-भाव) पर जोर देते हैं। इसी कारण समय के साथ इस शिवलिंग के सान्निध्य में शक्ति-परीक्षण, मुगदर घुमाना और हठयोग की परंपरा विकसित हुई। यह स्थानीय अखाड़ा संस्कृति और आगमिक 'वीर-भाव' का एक अत्यंत सुंदर और तार्किक समन्वय है।





