का सरल उत्तर
यद्यपि पुराणों में इसका सीधा उल्लेख नहीं है, परंतु काशी के अखाड़ों की परंपरा में पहलवान और हठयोगी इस शिवलिंग से आंतरिक बल (वीर-भाव) मांगते हैं। यह स्थानीय अखाड़ा संस्कृति और आगमिक योग का समन्वय है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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