विस्तृत उत्तर
शैव तंत्र में 'निशि पूजा' (रात्रि काल की पूजा) का अत्यधिक महत्व है क्योंकि महानिशा (अर्धरात्रि) में सूक्ष्म ऊर्जाएँ अत्यंत सक्रिय होती हैं। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) तथा प्रत्येक मास की मासिक शिवरात्रि के दिन यहाँ रात्रि-पूजन का विशेष आगमिक विधान है। तंत्र साधक महानिशा के एकांत में नाद और बिंदु का ध्यान करते हुए प्राणों को सुषुम्ना में प्रवेश कराने का अभ्यास करते हैं। अघोर साधक एकांत में चिता भस्म (पिशाचमोचन से लाई गई) से शिव का विशेष अभिषेक करते हैं।




