विस्तृत उत्तर
शिवरात्रि और महाशिवरात्रि दोनों भगवान शिव को समर्पित पर्व हैं, परंतु इन दोनों में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं जो इन्हें अलग बनाते हैं।
मासिक शिवरात्रि — हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस प्रकार एक वर्ष में कुल १२ मासिक शिवरात्रियाँ आती हैं। यह भगवान शिव की नियमित आराधना का दिन है। इस दिन मुख्यतः शिवजी की एकाकी पूजा की जाती है।
महाशिवरात्रि — यह केवल एक बार — फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को — वर्ष में आती है। इसे 'शिवरात्रियों की माता' कहा जाता है क्योंकि सभी शिवरात्रियों में इसका महत्व सर्वाधिक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव पहली बार ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे और भगवान विष्णु तथा ब्रह्मा की परीक्षा ली थी। इसी दिन शिव-पार्वती का विवाह भी हुआ था। इसलिए महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की भी विशेष पूजा का विधान है।
महाशिवरात्रि पर मंदिरों में भव्य उत्सव होते हैं, रात्रि जागरण किया जाता है और चार प्रहरों में पूजा होती है। मासिक शिवरात्रि अपेक्षाकृत सादी रहती है। महाशिवरात्रि आत्म-चिंतन और गहन ध्यान के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी गई है।




