विस्तृत उत्तर
हाँ, एकादशी व्रत महिलाएँ पूरी तरह से कर सकती हैं। यह व्रत स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फलदायी है। शास्त्रों में एकादशी व्रत को सभी वर्गों और आयु के लोगों के लिए उपयुक्त बताया गया है।
मासिक धर्म के समय के बारे में — यदि एकादशी के दिन किसी महिला को मासिक धर्म हो, तो वह स्वयं व्रत और पूजा में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं कर सकती। परंतु इस स्थिति में वह मानसिक रूप से भगवान विष्णु का स्मरण, भजन और कथा का श्रवण कर सकती है। उस दिन चावल का त्याग करना और सात्विक आहार लेना भी पुण्यकारी माना गया है। जब शुद्धि हो जाए तो द्वादशी पर स्नान कर पूजा करके व्रत का पारण करें।
यदि कोई महिला लंबे समय से एकादशी का व्रत रखती आ रही है और मासिक धर्म के कारण व्रत न रख पाए, तो वह घर में किसी अन्य सदस्य से व्रत रखवा सकती है। शास्त्रों में ऐसी स्थिति में पति से व्रत रखवाने का भी विधान उल्लेखित है।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ यदि पूर्ण उपवास न रख सकें, तो सात्विक फलाहार लेते हुए व्रत रख सकती हैं। इस विषय में अपने आराध्य और परंपरा के अनुसार निर्णय लेना उचित है।