विस्तृत उत्तर
पद्म पुराण में कहा गया है कि एकादशी के पापयुक्त अन्न को देवता और पितर ग्रहण नहीं करते।
पद्म पुराण में एकादशी अन्न का निषेध क्या है को संदर्भ सहित समझें
पद्म पुराण में एकादशी अन्न का निषेध क्या है का सबसे सीधा सार यह है: देव-पितर एकादशी अन्न स्वीकार नहीं करते।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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एकादशी श्राद्ध में ब्रह्मवैवर्त पुराण का मत क्या है?
एकादशी पर अन्न-श्राद्ध निषिद्ध है।
एकादशी श्राद्ध में अन्न क्यों वर्जित है?
क्योंकि एकादशी पर अन्न पापयुक्त माना गया है।
एकादशी श्राद्ध में शास्त्रीय समन्वय क्या है?
श्राद्ध करें, पर अन्न छोड़कर।
एकादशी के दिन अन्न (अनाज) क्यों नहीं खाते?
पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी के दिन 'पापपुरुष' (पापों का पुतला) अनाज में छुपकर बैठता है। इसलिए जो भी इंसान एकादशी के दिन अनाज खाता है, वह असल में पापों को खाता है।
एकादशी के दिन चावल (अन्न) खाना क्यों मना है?
शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन अनाज में पाप का वास होता है। इसलिए इस दिन चावल या कोई भी अन्न (अनाज), दाल, लहसुन, प्याज बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।
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