विस्तृत उत्तर
प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए रखा जाता है। इस व्रत में आहार के संबंध में शास्त्रों में स्पष्ट विधान है।
जो लोग पूर्ण उपवास कर सकते हैं वे निर्जल या केवल जल पीकर व्रत रखें। यह सर्वोत्तम माना गया है।
यदि पूर्ण उपवास संभव न हो तो फलाहार ग्रहण किया जा सकता है। फलाहार में ये चीजें शामिल हैं:
ताजे फल जैसे केला, सेब, अंगूर, पपीता आदि।
दूध और दूध से बनी चीजें — दही, पनीर, खीर, श्रीखंड।
साबूदाने की खिचड़ी या खीर।
सिंघाड़े के आटे के व्यंजन।
उबले आलू।
मखाना।
नारियल पानी और फलों का रस।
कुछ परंपराओं में हरे मूंग का सेवन करना विशेष रूप से प्रदोष व्रत में उचित माना जाता है, क्योंकि यह पृथ्वी तत्व है और पाचन के लिए हल्का होता है।
इस व्रत में जो वर्जित है वह है — गेहूं, चावल, दाल जैसे अन्न; लहसुन, प्याज; मांसाहार; और सामान्य नमक। सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है।
व्रत के दिन प्रदोष काल में (सूर्यास्त से लगभग ४५ मिनट पहले से ४५ मिनट बाद तक) भगवान शिव की पूजा के बाद आरती करें और उसके पश्चात व्रत का पारण करें।




