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विस्तृत उत्तर
स्वस्थ लोगों को यह व्रत निर्जला रखना चाहिए। जो न रह सकें, वे फलाहार (दूध, फल, साबूदाना, कंद-मूल) ले सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार संकष्टी में 'नक्त भोजन' (रात का भोजन) का नियम है, इसलिए चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद ही प्रसाद (मोदक) खाकर सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। अन्न (रोटी, चावल) दिन में बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।
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