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विस्तृत उत्तर
व्रत का नियम 3 दिनों (दशमी, एकादशी, द्वादशी) का होता है। दशमी के दिन से ही संयम आरंभ हो जाता है। व्रती को दशमी के दिन काँसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन में मसूर, चना, शहद और पराया अन्न पूर्णतः वर्जित है। एकादशी के दिन शरीर और मन की शुद्धि के लिए दशमी की रात्रि में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भूमि (जमीन) पर शयन करना चाहिए।
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