विस्तृत उत्तर
एकादशी व्रत का आध्यात्मिक आरंभ दशमी की रात्रि से ही हो जाता है। दशमी के दिन सूर्यास्त से पूर्व केवल एक बार शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। इस दिन कांसे के बर्तन में भोजन करना पूरी तरह मना है। साथ ही मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और मसूर की दाल का सेवन पूर्णतः निषिद्ध है। दशमी की रात में मन में भगवान का ध्यान करते हुए भूमि (जमीन) पर शयन करना चाहिए।

