विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार कालाष्टमी व्रत का पारण (व्रत खोलना) सामान्यतः अगले दिन सूर्योदय के बाद ही किया जाता है। यदि अष्टमी तिथि रात्रि में ही समाप्त हो जाए, तो भी पारण के लिए सूर्योदय की प्रतीक्षा करना शास्त्र सम्मत है। पारण करने (अन्न ग्रहण करने) से पूर्व काले कुत्ते को भोजन (रोटी, दूध आदि) अवश्य देना चाहिए, उसके पश्चात ही स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत पूर्ण करना चाहिए।





