विस्तृत उत्तर
व्रत का मानसिक आरंभ दशमी की रात्रि से ही हो जाता है। दशमी के दिन सूर्यास्त से पूर्व केवल एक बार सात्विक आहार लेना चाहिए। भोजन में मसूर की दाल, चना, शहद, कोदों, शाक और किसी दूसरे का दिया अन्न पूर्णतः मना है। इस दिन कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए। रात्रि में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए जमीन पर सोना चाहिए और दांतों की अच्छी तरह सफाई कर लेनी चाहिए ताकि मुंह में अन्न का कोई कण न बचे।
