विस्तृत उत्तर
अम्बरीष ने दुर्वासा को तब भोजन कराया जब दुर्वासा सुदर्शन चक्र से बचकर वापस आए और राजा से क्षमा माँगी। कथा के अनुसार दुर्वासा के भागने और लौटने में पृथ्वी पर एक वर्ष बीत गया। इस दौरान अम्बरीष ने स्वयं भोजन नहीं किया, क्योंकि वे अतिथि को भोजन कराए बिना अपना पारण पूर्ण नहीं करना चाहते थे। दुर्वासा की पीड़ा शांत कराने के बाद अम्बरीष ने उन्हें आदरपूर्वक आसन दिया, चरण पखारे और उत्तम भोजन कराया। जब दुर्वासा संतुष्ट हुए और उन्होंने राजा को भोजन करने की आज्ञा दी, तब अम्बरीष ने स्वयं पारण किया।
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