विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में शारीरिक क्षमता के अनुसार उपवास के 4 स्तर हैं: 1. 'निर्जल उपवास' (बिना जल के), जिसे पद्म पुराण में सर्वाधिक पुण्यदायी बताया गया है। 2. 'सजल/फलाहार' (जल, दूध, फल), जो सामान्य गृहस्थों के लिए निर्णयसिंधु में मान्य है। 3. 'एकभुक्त' (शाम को एक समय भोजन), जो वृद्धों/रोगियों के लिए नारद पुराण में है। 4. 'अनुकल्पा' (कुट्टू, साबूदाना आदि का सेवन), जो वैष्णव (ISKCON आदि) परंपरा में प्रचलित है।


