विस्तृत उत्तर
देवशयनी एकादशी से चार महीनों की अवधि यानी 'चातुर्मास' (श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) का आरंभ होता है। शास्त्रीय दृष्टि से इस समय सूर्य दक्षिणायन होता है जिसे देवताओं की रात्रि माना जाता है। साथ ही, वर्षा ऋतु शुरू होने के कारण साधु-संत यात्रा रोककर एक ही स्थान पर ठहरकर तपस्या करते हैं। इस दौरान बाह्य शुभ कार्यों (विवाह, मुंडन आदि) पर विराम लग जाता है और ऊर्जा का प्रवाह अंतर्मुखी (भक्ति और तप की ओर) हो जाता है।




