विस्तृत उत्तर
महर्लोक तक पहुँचने के जो साधन और कर्म शास्त्रों में वर्णित हैं वे सामान्य पुण्य कर्मों से अत्यंत उच्च कोटि के और अत्यंत कठिन हैं। केवल सकाम दान, सामान्य व्रत और भौतिक यज्ञ मनुष्य को अधिक से अधिक स्वर्लोक तक ही ले जा सकते हैं। परन्तु महर्लोक में प्रवेश के लिए विशुद्ध सत्त्वगुण, पूर्ण अनासक्ति और निष्काम भावना की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति अत्यंत कठोर तपस्या करते हैं, जो शास्त्रों में वर्णित महायज्ञों का निष्काम भाव से अनुष्ठान करते हैं और अपनी सम्पत्ति का अधिकांश भाग धर्मार्थ कार्यों में दान कर देते हैं वे मृत्यु के पश्चात ध्रुवलोक की कक्षाओं को पार करके महर्लोक तक पहुँचने के अधिकारी बन सकते हैं।
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