विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। खगोलीय दृष्टि से यह वह समय होता है जब सूर्य वृष राशि या मिथुन राशि में स्थित होता है। यह उत्तर भारत में भीषण ग्रीष्म (गर्मी) ऋतु का समय होता है, जब तापमान अपने उच्चतम स्तर पर होता है। इस भयंकर गर्मी में बिना अन्न और जल के उपवास रखना साधक के धैर्य और तपस्या की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा माना गया है।




